रंग : हरा
स्थिति :
यह छाती के मध्य, हृदय (Heart) क्षेत्र में स्थित होता है।
जिम्मेदार :
प्रेम, करुणा, क्षमा, भावनात्मक संतुलन और रिश्ते
अनाहत दो संस्कृत शब्दों से बना है। "अन" का अर्थ है नहीं और "आहत" का अर्थ है चोट पहुँचना। अनाहत का अर्थ है "जो कभी आहत नहीं हुआ" या "बिना टकराव के उत्पन्न होने वाली ध्वनि"।
अनाहत चक्र प्रेम और करुणा का केंद्र माना जाता है। यह हमें स्वयं से प्रेम करना, दूसरों को स्वीकार करना और क्षमा करना सिखाता है। यह निचले तीन भौतिक चक्रों और ऊपरी तीन आध्यात्मिक चक्रों के बीच पुल का कार्य करता है।
इस चक्र का तत्व वायु (Air) है। जैसे वायु स्वतंत्र रूप से बहती है, वैसे ही अनाहत चक्र की ऊर्जा भी प्रेम और सकारात्मक भावनाओं को पूरे शरीर में प्रवाहित करती है। जब यह चक्र संतुलित होता है तो व्यक्ति दयालु, शांत, सहयोगी और भावनात्मक रूप से स्थिर रहता है।
यह चक्र हृदय, फेफड़े, रक्त परिसंचरण और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। यदि इस चक्र में ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाए तो व्यक्ति भावनात्मक दर्द, अकेलापन, असुरक्षा और रिश्तों में कठिनाइयों का अनुभव कर सकता है। लेकिन जब यह चक्र संतुलित रहता है तो व्यक्ति प्रेम, आनंद और आंतरिक शांति का अनुभव करता है।
चक्र में असंतुलन
शारीरिक संकेत
हृदय चक्र के असंतुलित होने पर निम्न समस्याएँ दिखाई दे सकती हैं:
- हृदय संबंधी समस्याएँ
- उच्च या निम्न रक्तचाप
- अस्थमा
- फेफड़ों के रोग
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
- छाती में जकड़न
- कंधे और ऊपरी पीठ में दर्द
- थकान
मानसिक संकेत
क्या आपको लोगों पर विश्वास करने में कठिनाई होती है?
क्या आप पुराने दुखों को छोड़ नहीं पाते?
क्या आपको स्वयं से प्रेम करने में परेशानी होती है?
अवरुद्ध अनाहत चक्र के कुछ संभावित लक्षण:
- अकेलापन महसूस करना
- ईर्ष्या
- क्षमा न कर पाना
- भावनात्मक असुरक्षा
- दूसरों से अत्यधिक अपेक्षाएँ
- रिश्तों में समस्याएँ
- स्वयं से प्रेम की कमी
- क्रोध और दुःख को पकड़कर रखना
- भावनात्मक रूप से बंद हो जाना
चक्र को संतुलित कैसे करें
अनाहत चक्र को संतुलित रखने के लिए प्रेम, करुणा और कृतज्ञता का अभ्यास करें।
अपने बारे में सकारात्मक और सशक्त विचार दोहराएँ। Affirmations मन के नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में बदलने में सहायता करते हैं।
इन पुष्टि वाक्यों (Affirmations) का अभ्यास करें:
- मैं प्रेम के योग्य हूँ।
- मैं स्वयं को स्वीकार करता हूँ।
- मैं दूसरों को क्षमा करता हूँ।
- मेरा हृदय प्रेम और करुणा से भरा है।
- मैं शांति और संतुलन में हूँ।
आसन
अनाहत चक्र को सक्रिय और संतुलित करने वाले योगासन:
भुजंगासन | Cobra Pose
यह आसन छाती को खोलता है और हृदय क्षेत्र में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और भावनात्मक तनाव को कम करता है।
उष्ट्रासन | Camel Pose
यह शक्तिशाली बैक-बेंड आसन हृदय चक्र को सक्रिय करता है। यह छाती और फेफड़ों को फैलाता है तथा प्रेम और करुणा की भावना को बढ़ावा देता है।
मत्स्यासन | Fish Pose
यह आसन छाती, गले और फेफड़ों को खोलता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है।
सेतु बंधासन | Bridge Pose
यह आसन हृदय क्षेत्र को सक्रिय करता है तथा शरीर और मन में संतुलन स्थापित करने में सहायता करता है।
ध्वनि
जप और ध्वनि चिकित्सा (Sound Healing) हृदय चक्र को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ध्वनि शरीर में कंपन उत्पन्न करती है जो ऊर्जा को संतुलित करने में
सहायता करती है।
यं (YAM) अनाहत चक्र का बीज मंत्र है।
नीचे दिए गए लिंक के अनुसार आप इस ध्वनि का अभ्यास कर सकते हैं।
हीलिंग के लिए यहां क्लिक करें 👉 यं साउंड (YAM Sound For Healing)

Comments
Post a Comment