रंग : हरा स्थिति : यह छाती के मध्य, हृदय (Heart) क्षेत्र में स्थित होता है। जिम्मेदार : प्रेम, करुणा, क्षमा, भावनात्मक संतुलन और रिश्ते अनाहत दो संस्कृत शब्दों से बना है। "अन" का अर्थ है नहीं और "आहत" का अर्थ है चोट पहुँचना। अनाहत का अर्थ है "जो कभी आहत नहीं हुआ" या "बिना टकराव के उत्पन्न होने वाली ध्वनि"। अनाहत चक्र प्रेम और करुणा का केंद्र माना जाता है। यह हमें स्वयं से प्रेम करना, दूसरों को स्वीकार करना और क्षमा करना सिखाता है। यह निचले तीन भौतिक चक्रों और ऊपरी तीन आध्यात्मिक चक्रों के बीच पुल का कार्य करता है। इस चक्र का तत्व वायु (Air) है। जैसे वायु स्वतंत्र रूप से बहती है, वैसे ही अनाहत चक्र की ऊर्जा भी प्रेम और सकारात्मक भावनाओं को पूरे शरीर में प्रवाहित करती है। जब यह चक्र संतुलित होता है तो व्यक्ति दयालु, शांत, सहयोगी और भावनात्मक रूप से स्थिर रहता है। यह चक्र हृदय, फेफड़े, रक्त परिसंचरण और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। यदि इस चक्र में ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाए तो व्यक्ति भावनात्मक दर्द, अकेलापन, असुरक्षा और रिश्तो...
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